गुरुवार, 13 अगस्त 2009

आज मैनें यह ब्लॉग इसलिए बनाया है की मेरे अन्दर कुछ सत्य छिपें हैं जो जब भी मुझे याद आतें हैं मेरी आत्मा को कचोटते , अगर आप भी कुछ इस तरह का जीवन जी रहे हैं तो इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
पहला सत्य - मेरे पड़ोस मैं एक लड़की रहती थी । गोरी चिट्टी उम्र थी कोई १४ साल की मैं उस समय लगभग १५ साल का था मेरे घर मैं वीसीआर था वोह फ़िल्म देखने मेरे घर आती थी । एक बार जाडे की शाम को हम फ़िल्म देख रहे थे वोह आई और मेरी रजाई मैं घुस गई , धीरे धीरे वो मुझसे सट गई उसके नितम्ब मेरे लिंग से टकराने लगा और मैं उत्तेजित हो गया मैंने उसकी चड्डी उतर दी और धीरे धीरे उसके साथ सहवास किया बहुत खून निकला लेकिन उस समय मेरे कमरे मैं कोई नही था तो मैं डिटोल से उसका खून पोंछा । वो न तो नाराज हुई बल्कि खुसी से घर गई । बाकि बाद मैं बतायुन्गा

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